ये कविताए मेरी मौलिक रची हुई हे अभी तक ये कही भी प्रकाशित नहीं है व इन कविताओ को कोई अन्य अपने नाम से कही भी प्रकाशित नहीं कर सकता है व यदि कोई करना चाहता है तो उसे मेरी अनुमति लेनी होगी अन्यथा समस्त विवादों का भुगतान उसे स्वयम वहन करना होगा समस्त विवादों का न्याय क्षेत्र पिन्दवारा ( सिरोही), राजस्थान होगा ।
कोई भी अपनी प्रतिक्रिया व् अपने सुझाव व कविताए मुझे भेज सकता है व कविताओ के साथ उसे यह घोषणा भी करनी होगी की ये उसकी स्वरचित है अगर वे अपनी कविताये कभी भविष्य में प्रकाशित करवाना चाहे तो में उन्शे पहले अनुमति मांगूंगा वैसे में ये कविता क्रांति नमक एक मंच बना रहा ही की जहा हम नवोदित कविताओ का शोक रखने वाले अपने विचार आदान प्रदान कर सके व अपने विचारो को एक मंच दे सके मैंने अछे भावो से यह शुरू किया है इश्वर मेरी मदद करे..........
आया था कभी उसे एक झौंका क्रांति का
आज तक उसे याद है ........
करना चाहा था उसने अनुसरण
मगर कर ना पाया था ............
फिर ताज़ी हो गयी यादे फिर से
लहर सी चलने लगी है..............
क्यु नहीं क्रांति का बिगुल बजा ही दे
भावनाए उमड़ने सी लगी है.................
क्रांति तो करने से ही होगी ये
सत्य कौन मिटा सकता है...............
होगी फिर से वर्षा उमंगो की
अब ऐसा लगने सा लगा है.................
आया था कभी उसे एक झौंका क्रांति का
आज तक उसे याद है ........
Kavita kranti
Monday, November 29, 2010
Tuesday, November 23, 2010
श्वेत हंस तू है सबमे
देखकर तुझे तुझ पर
मन मयूर नाचे नचाये मुझे
तिमिर प्रहार पर प्रहार करे
श्वेत हंस तू है सबमे
ज्योति दीपक से चाहू और
नाचे नचाये तू निर्मल सलिल
ले जाये उस और ठोर जिसका
श्वेत हंस तू है सबमे
पल्लवित आशा निरखि
निरखाये आशा बल खाए घनघोर
निराशा प्राणों को ले जाये
श्वेत हंस तू है सबमे
जीवन के वन सघन तन पर
रूप तेरा कछु और
भांवन नैना प्यासी
रह जाये देखत देखत
श्वेत हंस तू है सबमे
प्रभात सुंदरी यौवन अंगड़ाई लेकर
ह्रदय कोश के पट लुटाने को
देख तेरी ये अदा ये निश दिन
अमृत पण मन जाये
श्वेत हंस तू है सबमे
कल अकाल रूप तेरे जब
सांसो पर करे अठखेलिया
जब रक्तिम लज्जा शर्माए
आश निराशा साथी बनकर
खेले और खिलाये
श्वेत हंस तू है सबमे
जीवन के कंटकमय रास्ते पर
वन पथिक सहचर आये
गीत संगीत नस नस में
भरकर तेरा गीत तू भर जाए
श्वेत हंस तू है सबमे
सांस जब घबराए घनघोर
आंधिया तुफानो संग आकर
पक्षी नीड़के तिनके
उड़ने जोरो से ले जाए
तब तू फिर से आश जगाये
श्वेत हंस तू है सबमे
झम झम तेरी चांदनी जब
अमावस्या आये नयन शुन्य हो जाये
लौट लौटकर फिर फिर आये
हर्षाये मन मंदिर गुंजाये
श्वेत हंस तू है सबमे
तडपत बिजलिया मिलन को
धरा तक अंम्बर से जब आये
बार बार मेघ गर्जन
मन मयूर प्याश आश जगाये
श्वेत हंस तू है सबमे
सर्पिनी दन्त तलवार लेकर
विष प्याला सजाये
मदमस्त पस्त हौसले कर
सांसो की डोर तोड़ ले जाए
तब तू जान दान ले आये श्वेत हंस तू है सबमे
विभीषिका प्रलय तांडव करे
जब महेश डमरू साज करे तब
दशो दिशा घबराये
प्रारथना ब्रह्मम रंघ्रा तक जाए
तब तेरी किरण रजनी पर छाये
श्वेत हंस तू है सबमे
देखकर तुझे तुझ पर
मन मयूर नाचे नचाये मुझे
तिमिर प्रहार पर प्रहार करे
श्वेत हंस तू है सबमे
ज्योति दीपक से चाहू और
नाचे नचाये तू निर्मल सलिल
ले जाये उस और ठोर जिसका
श्वेत हंस तू है सबमे
पल्लवित आशा निरखि
निरखाये आशा बल खाए घनघोर
निराशा प्राणों को ले जाये
श्वेत हंस तू है सबमे
जीवन के वन सघन तन पर
रूप तेरा कछु और
भांवन नैना प्यासी
रह जाये देखत देखत
श्वेत हंस तू है सबमे
प्रभात सुंदरी यौवन अंगड़ाई लेकर
ह्रदय कोश के पट लुटाने को
देख तेरी ये अदा ये निश दिन
अमृत पण मन जाये
श्वेत हंस तू है सबमे
कल अकाल रूप तेरे जब
सांसो पर करे अठखेलिया
जब रक्तिम लज्जा शर्माए
आश निराशा साथी बनकर
खेले और खिलाये
श्वेत हंस तू है सबमे
जीवन के कंटकमय रास्ते पर
वन पथिक सहचर आये
गीत संगीत नस नस में
भरकर तेरा गीत तू भर जाए
श्वेत हंस तू है सबमे
सांस जब घबराए घनघोर
आंधिया तुफानो संग आकर
पक्षी नीड़के तिनके
उड़ने जोरो से ले जाए
तब तू फिर से आश जगाये
श्वेत हंस तू है सबमे
झम झम तेरी चांदनी जब
अमावस्या आये नयन शुन्य हो जाये
लौट लौटकर फिर फिर आये
हर्षाये मन मंदिर गुंजाये
श्वेत हंस तू है सबमे
तडपत बिजलिया मिलन को
धरा तक अंम्बर से जब आये
बार बार मेघ गर्जन
मन मयूर प्याश आश जगाये
श्वेत हंस तू है सबमे
सर्पिनी दन्त तलवार लेकर
विष प्याला सजाये
मदमस्त पस्त हौसले कर
सांसो की डोर तोड़ ले जाए
तब तू जान दान ले आये श्वेत हंस तू है सबमे
विभीषिका प्रलय तांडव करे
जब महेश डमरू साज करे तब
दशो दिशा घबराये
प्रारथना ब्रह्मम रंघ्रा तक जाए
तब तेरी किरण रजनी पर छाये
श्वेत हंस तू है सबमे
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