ये कविताए मेरी मौलिक रची हुई हे अभी तक ये कही भी प्रकाशित नहीं है व इन कविताओ को कोई अन्य अपने नाम से कही भी प्रकाशित नहीं कर सकता है व यदि कोई करना चाहता है तो उसे मेरी अनुमति लेनी होगी अन्यथा समस्त विवादों का भुगतान उसे स्वयम वहन करना होगा समस्त विवादों का न्याय क्षेत्र पिन्दवारा ( सिरोही), राजस्थान होगा ।
कोई भी अपनी प्रतिक्रिया व् अपने सुझाव व कविताए मुझे भेज सकता है व कविताओ के साथ उसे यह घोषणा भी करनी होगी की ये उसकी स्वरचित है अगर वे अपनी कविताये कभी भविष्य में प्रकाशित करवाना चाहे तो में उन्शे पहले अनुमति मांगूंगा वैसे में ये कविता क्रांति नमक एक मंच बना रहा ही की जहा हम नवोदित कविताओ का शोक रखने वाले अपने विचार आदान प्रदान कर सके व अपने विचारो को एक मंच दे सके मैंने अछे भावो से यह शुरू किया है इश्वर मेरी मदद करे..........
आया था कभी उसे एक झौंका क्रांति का
आज तक उसे याद है ........
करना चाहा था उसने अनुसरण
मगर कर ना पाया था ............
फिर ताज़ी हो गयी यादे फिर से
लहर सी चलने लगी है..............
क्यु नहीं क्रांति का बिगुल बजा ही दे
भावनाए उमड़ने सी लगी है.................
क्रांति तो करने से ही होगी ये
सत्य कौन मिटा सकता है...............
होगी फिर से वर्षा उमंगो की
अब ऐसा लगने सा लगा है.................
आया था कभी उसे एक झौंका क्रांति का
आज तक उसे याद है ........
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